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समस्तीपुर में झूले से गिरकर 10 वर्षीय बच्चे की मौत, परिवार में मचा कोहराम

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समस्तीपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र स्थित वासुदेवपुर गांव में घर के झूले से गिरकर 10 वर्षीय आदित्य कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड से सोमवार सुबह एक ऐसी दुखद घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। खेल-कूद और हंसी-खुशी से भरी एक सामान्य सुबह कुछ ही क्षणों में मातम में बदल गई, जब घर के आंगन में झूला झूल रहे एक मासूम बच्चे की गिरने से मौत हो गई। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, जबकि गांव में भी शोक का माहौल है।

मिली जानकारी के अनुसार कल्याणपुर थाना क्षेत्र के वासुदेवपुर गांव निवासी रंधीर राय का 10 वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार रोज की तरह सुबह अपने घर के आंगन में खेल रहा था। गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों का अधिकांश समय घर और आसपास के वातावरण में खेलते हुए ही बीतता है। आदित्य भी घर में लगे रस्सी के झूले पर झूल रहा था। किसी ने नहीं सोचा था कि खेल-खेल में हुआ एक छोटा सा हादसा इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा।

परिजनों के अनुसार झूला झूलने के दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। संतुलन बिगड़ते ही वह झूले से छिटककर नीचे बने पक्के फर्श पर जा गिरा। गिरने के दौरान उसके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट लगी। चोट इतनी गंभीर थी कि वह तुरंत अचेत हो गया। उस समय घर के अन्य सदस्य अपने-अपने काम में व्यस्त थे और किसी को घटना की गंभीरता का तुरंत अंदाजा नहीं लग सका।

कुछ समय बाद जब बच्चे की मां घर के कामकाज से फुर्सत पाकर आंगन की ओर पहुंची तो उसने अपने बेटे को जमीन पर बेसुध पड़ा देखा। यह दृश्य देखते ही उसकी चीख निकल गई। मां की आवाज सुनकर परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते घर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

परिजन बिना समय गंवाए बच्चे को लेकर इलाज के लिए निकल पड़े। ग्रामीणों की मदद से उसे तत्काल समस्तीपुर सदर अस्पताल पहुंचाया गया। रास्ते भर परिवार के लोग यही उम्मीद करते रहे कि डॉक्टर किसी तरह बच्चे की जान बचा लेंगे। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों की जांच में स्थिति बेहद गंभीर पाई गई।

अस्पताल के आपातकालीन विभाग में डॉक्टरों ने बच्चे की गहन जांच की। चिकित्सकों ने आवश्यक परीक्षणों के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि गिरने के दौरान लगी गंभीर अंदरूनी चोटें और सिर पर हुए गहरे आघात के कारण उसकी मौत हो गई होगी। हालांकि वास्तविक स्थिति चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

जैसे ही अस्पताल में बच्चे को मृत घोषित किए जाने की सूचना मिली, परिवार में कोहराम मच गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वह बार-बार अपने बेटे को उठाने की कोशिश करती रही और बेसुध होकर गिर पड़ती थी। पिता रंधीर राय भी गहरे सदमे में हैं। परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार भी इस घटना से स्तब्ध हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि आदित्य बेहद मिलनसार और चंचल स्वभाव का बच्चा था। गांव के अन्य बच्चों के साथ वह हमेशा खेलता-कूदता रहता था। उसकी असमय मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचने लगे और शोक संवेदना व्यक्त करने लगे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। घरों में लगे झूले, छत, सीढ़ियां और अन्य स्थान कभी-कभी बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

समाज के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। कई लोगों ने कहा कि एक परिवार का इकलौता या सबसे प्यारा बच्चा जब अचानक दुनिया छोड़ देता है तो उस पीड़ा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। गांव में हर व्यक्ति इस घटना से दुखी है और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने का प्रयास कर रहा है।

घटना के बाद पूरे वासुदेवपुर गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। जहां कुछ घंटे पहले बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहीं अब हर ओर शोक और उदासी का माहौल दिखाई दे रहा है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव के लोग भी इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।

यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर हर समय सतर्क रहना कितना जरूरी है। खेलते समय बच्चों पर नजर रखना और घरेलू झूलों व अन्य साधनों की मजबूती की जांच करना कई बार ऐसे दर्दनाक हादसों को रोक सकता है।एक मासूम की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं होती, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अक्सर लोग घर के भीतर होने वाले संभावित खतरों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार घर के अंदर होने वाले हादसे भी उतने ही घातक साबित होते हैं जितने सड़क या अन्य दुर्घटनाएं।

समस्तीपुर की यह घटना बेहद दुखद है। यह सभी अभिभावकों को सावधान रहने का संदेश देती है कि बच्चों के खेलकूद के दौरान उनकी सुरक्षा और निगरानी पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

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